UPI पर 0.4% MDR: ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर व्यापारी कितना देंगे
₹2,000 से ऊपर के हर UPI पेमेंट पर व्यापारी को पूरी राशि का 0.4% देना होगा, लेकिन ₹300 से ज़्यादा नहीं। ₹2,000 तक के पेमेंट मुफ़्त रहेंगे, और NPCI के अनुसार ये मर्चेंट पेमेंट का 95% से ज़्यादा हिस्सा हैं।
NPCI कुछ UPI मर्चेंट पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू कर रहा है। पहले यह 15 अक्टूबर 2026 से शुरू होना था, लेकिन 13 अक्टूबर को NPCI ने इसे दिवाली के तुरंत बाद तक टाल दिया। सही तारीख अलग से बताई जाएगी। यानी व्यापारियों के पास अपना हिसाब दोबारा लगाने के लिए कुछ हफ़्ते हैं।
कौन से UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा
नियम सिर्फ़ ग्राहक से व्यापारी (P2M) पेमेंट पर लागू है। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (P2P) को पैसे भेजना मुफ़्त रहेगा।
| पेमेंट | व्यापारी का चार्ज |
|---|---|
| ₹2,000 तक P2M | 0 |
| ₹2,000 से ऊपर P2M | पूरी राशि का 0.4%, अधिकतम ₹300 |
| रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन, ₹2,000 से ऊपर | हर ट्रांज़ैक्शन पर ₹5 |
| छोटे P2PM व्यापारी (QR से महीने में ₹1 लाख तक) | 0 |
ध्यान दें: 0.4% पूरी राशि पर लगता है, सिर्फ़ ₹2,000 से ऊपर वाले हिस्से पर नहीं। ₹3,000 के पेमेंट पर ₹12 लगेंगे, ₹50,000 पर ₹200। ₹75,000 के पेमेंट पर चार्ज ₹300 की सीमा तक पहुँच जाता है और उसके बाद नहीं बढ़ता।
भारतीय मीडिया में छपी जानकारी के अनुसार यह चार्ज व्यापारी देता है और इसे ग्राहक से अलग से वसूलने का इरादा नहीं है। यह पैसा बैंकों, पेमेंट कंपनियों और ऐप्स के बीच बँटता है, सरकार के पास नहीं जाता। NPCI का कहना है कि इससे UPI के विस्तार, मज़बूती और साइबर सुरक्षा पर खर्च होगा, और यह दर कार्ड और वॉलेट से कम है।
महीने में कितना खर्च होगा: एक उदाहरण
मान लीजिए एक ऑनलाइन दुकान है (यह सिर्फ़ उदाहरण है, असली ग्राहक नहीं) जिसके पास महीने में 1,000 UPI पेमेंट आते हैं:
| बिल | पेमेंट | हर पेमेंट पर चार्ज | कुल |
|---|---|---|---|
| ₹1,200 | 700 | ₹0 | ₹0 |
| ₹4,000 | 250 | ₹16 | ₹4,000 |
| ₹90,000 | 50 | ₹300 (सीमा) | ₹15,000 |
| कुल | 1,000 | ₹19,000 |
इस दुकान का टर्नओवर ₹63.4 लाख है और चार्ज ₹19,000, यानी लगभग 0.3%। दिलचस्प बात यह है कि खर्च का लगभग 80% हिस्सा सिर्फ़ 50 महँगे ऑर्डर से आता है, जबकि 700 छोटे ऑर्डर पर कुछ नहीं लगता।
दूसरा उदाहरण: ₹4,999 का ऑनलाइन कोर्स, महीने में 600 बिक्री। हर पेमेंट पर ₹20, यानी महीने में ₹12,000। यहाँ ₹300 की सीमा कोई मदद नहीं करती।
अपने आँकड़े हमारे फ़ीस कैलकुलेटर में डालकर देखें: दर 0.4% और अपना औसत बिल लिखें, और ₹75,000 से ऊपर के बिल पर सीधे ₹300 मानें।
किस बिज़नेस के मुनाफ़े पर सबसे ज़्यादा असर
हमारी राय में सबसे ज़्यादा असर उन बिज़नेस पर होगा जिनका औसत बिल ₹2,000 से ₹75,000 के बीच है और मार्जिन कम है: इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑनलाइन कोर्स, ट्रैवल, सालाना सब्सक्रिप्शन। इन्हें पूरी दर देनी होगी और इनका UPI वॉल्यूम आमतौर पर बड़ा होता है।
छोटे बिल वाले बिज़नेस, जैसे फ़ूड डिलीवरी या छोटी रिटेल दुकानें, पर लगभग असर नहीं होगा। बहुत बड़े बिल वालों को सीमा का फ़ायदा मिलेगा: ₹1.5 लाख के पेमेंट पर ₹300 यानी सिर्फ़ 0.2%।
₹2,000 से नीचे रहने के लिए कीमत को दो हिस्सों में बाँटने का मन हो सकता है। हम जल्दबाज़ी की सलाह नहीं देंगे। NPCI ने अभी नहीं बताया है कि ऐसे तरीकों को कैसे देखा जाएगा, और कुछ ग्राहक दूसरा पेमेंट करेंगे ही नहीं। उससे होने वाला नुकसान बचाए गए ₹16 से कहीं ज़्यादा हो सकता है।
लॉन्च से पहले अपने PSP से क्या पूछें
0.4% पूरे सिस्टम की दर है। आपके PSP का कॉन्ट्रैक्ट अलग हो सकता है: कोई इसे मौजूदा दर में शामिल करेगा, कोई ऊपर से जोड़ेगा। इसलिए पूछ लें:
- ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर चार्ज कैसे और किस तारीख से लगेगा;
- क्या आपके कॉन्ट्रैक्ट में भी ₹300 की सीमा लागू होगी;
- क्या आपका बिज़नेस ₹5 वाली कैटेगरी में आता है;
- क्या सेटलमेंट रिपोर्ट में MDR अलग लाइन में दिखेगा।
अगर जवाब साफ़ नहीं हैं, तो दूसरे विकल्प देखने का यह सही समय है। UPI स्वीकार करने वाले प्रोवाइडर हमारे भारत के पेमेंट मेथड पेज पर मिल जाएँगे।
इस हफ़्ते का एक काम: पिछले महीने के UPI पेमेंट निकालें, ₹2,000 से ऊपर वाले पेमेंट की कुल राशि जोड़ें और उसे 0.4% से गुणा करें। दस मिनट में आपके पास अंदाज़े की जगह असली आँकड़ा होगा।
स्रोत
यह लेख PayFlow संपादकीय टीम ने AI की मदद से ऊपर दिए सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार किया है। यह केवल जानकारी के लिए है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं; प्रदाताओं की शर्तें बदलती रहती हैं — मौजूदा शर्तें ऑपरेटर से पूछें।