पारंपरिक एक्वायरिंग में बैंक सीधे मर्चेंट से अनुबंध करता है। क्वासी व्यवस्था में खरीदार एजेंट या एग्रीगेटर को भुगतान करता है, जो फिर एजेंसी अनुबंध के तहत मर्चेंट से हिसाब करता है। भुगतान करने वाले को यह सामान्य कार्ड भुगतान जैसा दिखता है।

क्वासी-एक्वायरिंग तब इस्तेमाल होती है जब सीधी एक्वायरिंग उपलब्ध नहीं: स्थानीय कंपनी नहीं है, बिज़नेस हाई-रिस्क है या बैंक की जाँच धीमी है। जुड़ना तेज़ होता है, लेकिन रेट आमतौर पर ज़्यादा और रिज़र्व व पेआउट की शर्तें सख़्त होती हैं।

कानूनी ढाँचे को समझें: किसका MCC इस्तेमाल होता है, चार्जबैक के लिए पेमेंट सिस्टम के सामने कौन ज़िम्मेदार है और एजेंट कितनी जल्दी पैसा भेजता है।

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